हीरो बनना कौन चाहता है मैं तो विलेन हूं 

तुम लोग परिवार के साथ यहां चैन से जियो.. इसलिए हमलोग रोज बॉर्डर पर मरते हैं 

खिलाड़ी था… अब पूरा खेल हूं  

किसकी मजाल जो छेड़े दिलेर को, गर्दिश में घेर लेते हैं गीदड़ भी शेर को 

पीने की कैपेसिटी, जीने की स्ट्रेंथ, अकाउंट का बैलेंस और नाम का खौफ.. कभी भी कम नहीं होना चाहिए

डोंट एंग्री मी

जो मैं बोलता हूं, वो मैं करता हूं.. जो मैं नहीं बोलता वो मैं डेफिनेटली करता हूं 

अपुन का फटका 440 वोल्ट का झटका 

मैंने सिर्फ इंसान बनाया, और इंसान ने ये जात, पात, धर्म, मजहब का धंधा शुरू किया 

सिंह जहां पैर रखता है… वो इलाका उसका हो जाता है